बादशाह ने धमकी दी तो मेवों ने अनसुना कर दिया

गड़ाजान

✍---------- अलख के कुएँ की जंग----------***

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    गढ़-बिलग के भूपति रायभान के वीरों ने ऊँटों पर दिल्ली से आगरा जा रहे,बादशाह शाहजहाँ के खजाने को लूट लिया।

     शाहजहाँ ने खजाना वापिस मांगा तो उसे 'टका सा जवाब' दे दिया गया।

     बादशाह ने धमकी दी तो मेवों ने अनसुना कर दिया।

     परिणामस्वरूप बादशाह ने जयपुर राज्य के आह्लाद सिंह को एक मजबूत सैनिक टुकड़ी के साथ भेजा कि मेवों से जुर्माना सहित खजाना वसूल करो।

     आह्लाद सिंह गढ़ पहुँचा और अलख के कुएँ के पास सैना का शिविर डाल दियि।

     उस समय गाँव में यही एक मात्र कुआँ था जहाँ से गाँव वाले पानी की आपूर्ति करते थे।

     इसी समय इत्तिफाक से लाभान्वित के घर पौता का जन्म हुआ।

    पूरे गाँव में खुशी मनाई गई।

     बहु ने इस खुशी में कुआँ पूजने की इच्छा जताई।

     मगर कुएँ पर तो सैना का घेरा था।---बहुत को समझाया गया। मगर उसने (बहू ने) जिद पकड़ ली।

     आखिर आह्लाद सिंह से कुआँ पूजने की इजाजत मांगी गई।

     इजाजत मिली। मगर इस शर्त के साथ कि गाना-बजाना नहीं होगा। औरतें चुपचाप आएं और कुआँ पूजने कर चुपचाप वापिस चली जाएँ।

     मगर बहू नहीं मानी। बोली "खुशी का मौका है। हम तो गाएंगे भी और बजाएंगे भी।"

     मगर इसकी इजाजत नहीं मिली। कहा गया,"यदि ढ़ोल बजा तो सैना हमला कर देगी।"

     मगर तिरिया हठधर्मी के सामने सब हार गये। औरतों ने श्रृंगार किया। मीरासी ने गले में ढ़ोल डाला और नौजवानों ने तलवारें संभाली।

     औरतें गाती हुई निकली। मीरासी ने ढ़ोल पर थाप मारी और सैना ने हमला किया।

     भयंकर रण पड़ा। वीर मेवाती सैना को धकेलता हुए आगे बढ़े। भयंकर रण के बीच औरतों ने कुआँ पूजा और गाती-बजाती वापिस हुई।

     हजारों नौजवान और सैनिक खेत रहे। खून की नदियाँ  बहने लगी। हजारों ललनाएं विधवा हो गई।

     मगर चेतावनी देकर,चुनौती के साथ कुआँ पूजा गया।----  मैं आज भी मेवातियों के उसी साहस,निडरता और जज्बे को ढूंढ रहा हूँ।

     काश! कि कहीं मिल जाए।

   इत-बात सू जौधा पिळा, कोई धरे न धीर।

   जितना पल्टां रणबीर का,उत्तर लाड़ां चौकी चीर।।

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- सिद्दीक अहमद मेव

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