अफ़सोस, इतनी महान शख़्सियत को आजतक भारत रत्न नहीं दिया गया, हालाँकि जस्टिस काटजू इसकी माँग कर चुके हैं।

मेरठ

आजाद हिन्दुस्तान में लाल किले पर ब्रिटिश हुकूमत का झंडा उतारकर तिरंगा लहराने वाले, महान स्वतंत्रता सेनानी, कुशल राजनेता, महान देशभक्त, प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता शाहरूख खान के नाना, पूर्व केंद्रीय मंत्री, आज़ाद हिन्द फौज के मेजर जनरल, सुभाष चंद बोस के साथी ‘जनरल शाहनवाज खान’। 



इस मुल्क के लिए जिन लोगों ने अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया, उनमें जनरल शाहनवाज खान का नाम अगली पंक्ति में आता है।

लालकिले में हर रोज शाम को लाइट एंड साउंड का जो कार्यक्रम होता है, उसमें नेताजी के साथ जनरल शाहनवाज खान की आवाज रहती है।



बँटवारे के वक़्त जब मुसलमान यहाँ से पाकिस्तान जा रहे थे तो इस मुल्क से बेलौस मोहब्बत के चलते पाकिस्तान से मेजर शाहनवाज खान वापस भारत चले आए। अपना लगभग पूरा परिवार पाकिस्तान में छोड़कर यहाँ आकर बस गए। 

पंडित नेहरु के कहने पर इन्होंने मेरठ लोकसभा से चुनाव लड़ा और मेरठ लोकसभा सीट से चार बार सांसद बनें, साथ ही साथ केंद्र में मंत्री भी रहे। 



लेकिन ये भी प्रकृति का खेल देखिए कि 1965 में भारत पाक युद्ध में पाकिस्तान की तरफ़ से इनके बेटे कर्नल महमूद अली युद्ध में शामिल थे। आप यहाँ केन्द्रीय मंत्री थे तो दूसरी तरफ  बेटा पाकिस्तान सेना में बड़ा अफ़सर था। बँटवारे का दर्द इससे बड़ा और क्या हो सकता है। 



हालाँकि उस वक़्त कुछ नासमझ लोग शाहनवाज खान साहब से इस्तीफ़ा लेने पर अड़े थे, शाहनवाज साहब मन भी बना लिए थे इस्तीफ़ा देने को। पर लाल बहादुर शास्त्री ने खुलकर इनका साथ दिया और विरोधियों को करारा जवाब दिया। 



 अफ़सोस इस बात का है इनकी कुर्बानियों को ये देश लगभग भूल चुका है। आज इन्हें कोई याद करने वाला नहीं है। न ही कांग्रेस, न सरकार, न ही समाज।



अफ़सोस, इतनी महान शख़्सियत को आजतक भारत रत्न नहीं दिया गया, हालाँकि जस्टिस काटजू इसकी माँग कर चुके हैं।

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