लखनऊ सेंट पॉल कॉलेज की 14 वर्षीय 10वी की छात्रा अलीना अख़्तर ने भेजा सी एम योगी को पत्र

लखनऊ

स्कूल चलाने वाले इस अपील पर ज़रूर ध्यान दे यां दर्द हर ईमानदार परिवार का है जिस के बच्चे इल्म हासिल करना चाहते हैं।।।



*लखनऊ सेंट पॉल कॉलेज की 14 वर्षीय 10वी की छात्रा अलीना अख़्तर ने भेजा सी एम योगी को पत्र*



 **कहा माननीय मुख्यमंत्री जी हम पढ़ना चाह रहे हैं* 



सेवा में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथज जी

पूरे देश के सबसे प्रिय मेरे प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी मैं ये चिट्ठी मजबूर होकर दुखी मन से लिख रही हूं,

पूरी उम्मीद है आप मेरे मन की बात को अच्छे से समझेंगे, और इस पर कोई सार्थक कदम उठायेंगे!

माननीय मुख्यमंत्री जी हमने चिल्ड्रन पैलेस स्कूल से नर्सरी के.जी की पढ़ाई शुरू करके सेंट पॉल कॉलेज लखनऊ में पढ़ते हुए हाई स्कूल क्लास 10 में पहुंच चुकी हूं! 

और मेरा बड़ा भाई इंटर फ़ाइनल करके कॉलेज में जाने की तैयारी कर रहा है,

अभी तक की पढ़ाई के दौरान मैंने अपने डैडी को खूब जद्दोजहद करते देखा है, समय के साथ साथ उनकी परेशानी को बढ़ते हुए देखा है, पहले तो ऊपर की क्लास की किताबें भी काम आ जाती थीं, जिससे कुछ राहत मिल जाती थी, धीरे धीरे ये चलन भी खत्म हो गया हर साल सेलेबस चेंज हो जाता है, और खूब मंहगा हो जाता है, पढ़ाई पूरी होते ही हर क्लास के बच्चों की किताबें रद्दी हो जाती हैं, वो नीचे क्लास के बच्चों के दोबारा काम नहीं आ सकती हैं!

ऐसा क्यों किया जाता है, पता नहीं!

कॉपी किताबें और स्कूल की फ़ीस इतनी मंहगी हो चुकी हैं, कि बीच में एक पेन या रजिस्टर भी खरीदना दूभर लगने लगा है, इसके अलावा कंपटीशन और पढ़ाई इतनी टफ कर दी गई है कि बगैर ट्यूशन के कुछ भी समझ पाना सम्भव नहीं है!

उसकी फीस भी कहीं से कम नहीं है!

फ़ीस का इंतज़ाम करने में हम लोग डैडी को बहुत ज़्यादा परेशान होते देखते हैं उनकी ये परेशानी देख कर हम लोगों को बहुत रोना आता है, कई मर्तबा मन करता है, पढ़ाई छोड़ दूं, पर आप सब की कही बातें याद आ जाती हैं कि बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ, और पढ़ेगा इंडिया तो आगे बढ़ेगा इण्डिया!

माननीय मुख्यमंत्री जी बड़े भाई के एडमिशन के लिए हमने डैडी को एक लाख रुपए का इंतजाम करने के लिए मम्मी का जेवर बेचते देखा है! क्योंकि हमने अपने डैडी को बहुत ईमानदारी से पत्रकारिता करते देखा है, वो किसी से भी गलत तरीक़े से एक रुपया नहीं कमाते हैं, ईमानदारी का ही सबक हम लोगों को भी पढ़ाते हैं! मेरे डैडी को उनकी ईमानदारी और अच्छे लेख लिखने की वजह से कई जगह सम्मान मिल चुका है, पर इससे घर का खर्च तो नहीं चलता है, मेरे डैडी की कमाई बहुत सीमित है, ऐसे में मेरी व भाई की पढ़ाई के लिए आगे वो क्या करेंगे हमें नहीं मालूम!



माननीय मुख्यमंत्री जी हम पढ़ना चाह रहे हैं! हमारे जैसे लाखों बच्चों की भी कहानी हमारे जैसी ही है!



आपने अपने प्रदेश में बहुत सारे अच्छे बदलाव किए हैं,

हाथ जोड़ कर विनती है शिक्षा के क्षेत्र में भी कुछ ऐसा बदलाव कर दीजिए जिससे कि शिक्षा सबके लिए सस्ती हो सके।

हर साल किताबों को बदलने का चलन भी खत्म कर दीजिए, ताकि वो किताबें नीचे क्लास के बच्चों के काम आ सकें, और इतनी किताबों व कापियों को बनाने के लिए हजारों पेड़ों को भी अपनी जान न देनी पड़े।



आपके प्रदेश की एक अदना सी बच्ची



 *अलीना अख़्तर* 

D/0 परवेज़ अख़्तर

556/9 सुजान पूरा आलमबाग लखनऊ 226005

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