ट्रैफ़िक सिग्नल पर बाल शिशु को गले में लटका कर भिख मांगने वाली महिलाओं की जाँच पड़ताल ज़रूरी, बालाधिकार हनन की आशंका :-ह्यूमन राइट्स जस्टिस असोसिएशन ने जिल्हाधिकारी से की मांग
बालशिशु, बालक और महिलाओं की दयनीय अवस्था का जिम्मेदार कौन?

पुणे दि.13जुलै

 राईटस जस्टिस असोसियेशन की ओर से पुणे जिल्हा अधिकारी को सिग्नल पर झोली में शिशु को लटका कर भिख मांगने वाले भिखारियों की तत्काल जाँच कर उचित कारवाई करने का ज्ञापन सौंपा गया.

इस मामले को ले कर ह्यूमन राइट्स जस्टिस असोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तनवीर मुजावर , जिल्हा उपाध्यक्ष आमीर आत्तार, जिल्हा सरचिटणीस चंद्रशेखर पात्रे जिल्हा सदस्य शहजाद मुलाणी इत्यादि ने उपजिल्हा अधिकारी जयश्री कटारे जी से विस्तृत चर्चा की .

आजकल पुणे के हर चौक में , हर सिग्नल पर भिख मांगने वाली टोली दिखाई पडती है. इस टोली में मुख्यतः बाल शिशु, बालक और महिलाएं है. महिलाओं की झोली में तीन-चार महिने के छोटे शिशु नज़र आते है.ये बालशिशु हमेशा सोये हुए रहते है.पुणे जैसे शहर में जहाँ हर सिग्नल पर गाड़ियों की लंबी लंबी लाईन लगी रहती है. गाड़ियों के इंजन की, हॉर्न की कर्णकर्कश आवाज से शिशु की नींद नही खुलती ये अचंभित करने वाली बात है. हो सकता है इन शिशुओं को नशीली दवाईयां दी जाती हों ऐसी आशंका ह्यूमन राइट्स जस्टिस असोसिएशन के सदस्यों ने व्यक्त कर रहे है .

इस मामले में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तनवीर मुजावर ने उपजिल्हाधिकारी मा.जयश्री कटारे जी से कहा की इन टोलियों में बालशिशुओं के व्यतिरिक्त छोटे बालक और बालिकाएं भी रहती है. इन सबका भविष्य क्या होगा. ना शिक्षा, ना रहने का ठिकाना. अगर इन्हे नशीली दवाईयां दी जाती है तो आगे इनका क्या होगा. पुणे के हर सिग्नल पर पोलिस तैनात रहती है मगर उन्हें ऐसे मामले से कोई सरोकार नही.कोई कारवाई नही होती.सिग्नल सिग्नल पर भिख मांगने वाली टोली की जाँच कर उचित कारवाई की मांग का आवेदन पत्र जिल्हाधिकारी को सौंपा गया.इस अवसर पर पुणे जिल्हा उपाध्यक्ष अमीर आत्तार, जिल्हा सरचिटणीस चंद्रशेखर पात्रे जिल्हा सदस्य शहजाद मुलाणी इत्यादि उपस्थित थे.

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