जब इलियास को गिरफ्तार किया गया तो उनका छोटा बच्चा 15 दिन का था और जब आज वह UAPA में जेल से निर्दोष रिहा हुए है तो उनका वो ही बच्चा 9 साल का हो चुका है क्या सरकार व सुप्रीम कोर्ट दोषी अधिकारियों को जेल भेजेगी ?
जब इलियास को गिरफ्तार किया गया तो उनका छोटा बच्चा 15 दिन का था और जब आज वह UAPA में जेल से निर्दोष रिहा हुए है तो उनका वो ही बच्चा 9 साल का हो चुका है क्या सरकार व सुप्रीम कोर्ट दोषी अधिकारियों को जेल भेजेगी ?

आओ UAPA की पूजा करते है करते है क्योंकि जब इलियास को गिरफ्तार किया गया तो उनका छोटा बच्चा 15 दिन का था और जब आज वह UAPA में जेल से रिहा हुए है तो उनका वो ही बच्चा 9 साल का हो चुका है,इरफ़ान (33) इलियास (38) को मुम्बई की विशेष अदालत ने UAPA से 9 साल बाद बरी किया है और कहा कि आपके ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत नही इसलिए बरी किया जाता है,इलियास और इरफान महाराष्ट्र एटीएस द्वारा अगस्त 2012 में नांदेड़ से गिरफ्तार किए गए पांच लोगों में शामिल थे,जिन्हें एटीएस ने गिरफ्तार कर कहा था कि वे राजनेताओं,पुलिस अधिकारियों और पत्रकारों की हत्या करने की लश्कर ए तैयबा की साज़िश का हिस्सा थे,लेकिन अब 9 वर्ष अदालत ने इलियास व इरफ़ान को यह कहते हुए बरी कर दिया कि "उनके ख़िलाफ़ कोई सबूत नही है"

गिरफ्तार होने से पहले इलियास का नांदेड़ में फलों का कारोबार था जबकि इरफान के पास इन्वर्टर बैट्री की दुकान थी,इलियास ने कहा कि उन्होंने कम से कम चार जमानत आवेदन दायर किए लेकिन हर बार खारिज कर दिया गया।

 इरफान के मामले में, 2019 में उम्मीद की एक किरण दिखाई दी, जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह कहते हुए जमानत दे दी कि प्रथम दृष्टया यह मानने का कोई उचित आधार नहीं है कि उनके खिलाफ आरोप सही थे।  हालांकि उच्चतम न्यायालय द्वारा एनआईए की इस दलील के बाद कि "अपराध की पुनरावृत्ति की संभावना है जो राष्ट्र की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है, उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने के बाद, इरफ़ान चार महीने के भीतर वापस जेल भेज दिया गया था"।

जेल से रिहा होने के बाद इरफान ने कहा कि “मैं चार महीने से जमानत पर बाहर था,मैं अपने जीवन को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा था,मुझे उम्मीद थी कि मुझे फिर कभी जेल नहीं जाना पड़ेगा लेकिन मुझे आत्मसमर्पण करना पड़ा और आत्मसमर्पण करने के बाद मैंने जो 18 महीने जेल में बिताए, वे पिछले सात वर्षों की तुलना में अधिक कठिन थे"

 

इलियास ने कहा कि "उनका बरी होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि उन्हें पता था कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है।  “मेरी गिरफ्तारी के बाद, मेरे व्यवसाय को बंद करना पड़ा क्योंकि मकान मालिक ने हमें परिसर खाली करने के लिए कहा था।  यह जानते हुए भी कि मेरे खिलाफ मामला कमजोर है, मैं उच्च न्यायालयों में अपनी जमानत याचिकाओं पर अनुवर्ती कार्रवाई नहीं कर सका, क्योंकि मेरे पास कानूनी या वित्तीय क्षमता नहीं थी,अगर मुझे पहले ही जमानत दे दी जाती तो मेरे खिलाफ कोई सबूत न होने के बावजूद मैं अपनी जिंदगी के इतने साल नहीं गंवाता,जब मुझे गिरफ्तार किया गया तो मेरा सबसे छोटा बच्चा सिर्फ दो सप्ताह से अधिक का था,पिछले नौ वर्षों में वह 2017 में तलोजा जेल में केवल एक बार अपनी पत्नी और तीन बच्चों से मिले।

अब कुचलने वालों को इंसाफ़ नही बल्कि कुचलकर इंसाफ़ दिया जा रहा है,सिस्टम की जवाबदेही तय ना होने के कारण इलियास, इरफ़ान समेत हज़ारो लोगों ने युवाओं ने अपनी स्वतंत्रता के दशकों को जेल में बर्बाद कर दिया,जिला अदालत ने आज तक किसी भी अधिकारी की ना जवाबदेही तय की ना किसी अधिकारी फटकार लगाई,ना हाइकोर्ट ने किसी जिला अदालत की जवाबदेही तय की ना किसी अदालत को फटकार लगाई और ना ही सुप्रीम कोर्ट ने किसी हाइकोर्ट से कहा कि निर्दोषों को जेल भेजने वाले अफ़सरो पर कार्रवाई की जाये,ख़ैर छोड़िए अपने जीवन को सिस्टम का शिकार होने के बाद जेलों में बर्बाद कर चुके युवकों या उनके परिजनों को मुआवजा तक नही दिया जाता है,सच कहें तो देश की सरकारें और सिस्टम मुस्लिमों से डरता है ये ही कारण है कि उन्हें संविधान की आड़ में जेलों में पीस रहा है उनके जीवन को तबाह कर रहा है उनके परिजनों को जीते जी मार रहा है उसके बाद भी ख़ुद को न्यायाधीश माना जा रहा है।

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