पंचायत चुनाव: बगावत कर जीती प्यार की जंग, अब प्रधानी चुनाव मैदान में संभाला मोर्चा।
पंचायत चुनाव: बगावत कर जीती प्यार की जंग, अब प्रधानी चुनाव मैदान में संभाला मोर्चा।

वाराणसी

पूजा गुप्ता -मुम्बई में पली-बढ़ी ग्रेजुएट युवती ने भरा नामांकन, चुनाव लड़ने की बताई ये वजह,

उत्तर प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2021 नामांकन प्रक्रिया के तहत दूसरे चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के आराजी लाईन विकास खंड के कचनार ग्राम प्रधान सीट से पहला नामांकन मुम्बई यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट कचनार गाँव निवासिनी पूजा गुप्ता ने दाखिल किया। बतौर प्रस्तावक अपने पति समाजसेवी राजकुमार गुप्ता की ओर से महिला सीट से नामांकन भरा। मुम्बई यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट पूजा पेशे से स्वैच्छिक सेवा प्रदाता शिक्षिका हैं गरीब और वंचित वर्गों के बेहतरी के लिए कई मोर्चों पर संघर्ष कर रही है। बताते चलें कि पूजा वर्ष 2013 में वाराणसी आईं तो थी एक शादी समारोह में हिस्सा लेने, लेकिन उन्हें यहां अपना पहला प्यार मिल गया। प्यार परवान चढ़ा तो घर से बगावत कर शादी कर ली। पूजा के पति आराजी लाइन ब्लॉक से वर्ष 2010 में क्षेत्र पंचायत मेंबर रह चुके हैं और ब्लाक प्रमुख चुनाव भी लड़ चुके है। राजकुमार इस बार प्रधानी चुनाव की तैयारी कर रहे थे लेकिन गाँव की प्रधान सीट महिला कैंडिडेट्स के लिए रिजर्व हो गई तो पूजा ने मोर्चा संभाल लिया है। प्यार के जंग में जीत हासिल करने के बाद पूजा अब चुनावी मैदान में विजेता बनने का दावा कर रही हैं। पूजा के पति समाजसेवी आरटीआई एक्टिविस्ट राज कुमार गुप्ता दिव्यांग हैं। यह उनकी दूसरी शादी है। राज कुमार की पहली शादी 2010 में परिवार की रजामंदी से हुई थी। लेकिन अप्रैल 2011 में किडनी फेल होने की वजह से पत्नी की मौत हो गई। कुछ दिनों तक गम और उदासी का जीवन जीने के बाद राज कुमार ने हिम्मत बटोरी और समाज सेवा में जुट गए। फिर राजनीति में उतरे गाँव वालो ने समाजसेवा में उत्कृष्ट कार्य करने पर राजकुमार को चंदा देकर क्षेत्र पंचायत मेंबर बनाया।दोस्ती से शादी तकराज कुमार के जीजा की बहन की शादी में पूजा काशी के पंडितपुर गांव में आईं थी। वहां दोनों की दोस्ती हुई। इसके बाद दोनों को सोशल मीडिया और नजदीक ले आया। धीरे-धीरे प्यार परवान चढ़ने लगा। राज कुमार ने मुंबई जाकर पूजा से शादी का फैसला किया। लेकिन परिवार के लोग तैयार नहीं हुए। पूजा अप्रैल 2014 में पंडितपुर गांव अपने भाई की शादी में आई।परिवार से बगावत करके 17 तारीख को दोनों ने पहले मंदिर और फिर कोर्ट जाकर शादी कर ली। एक 3 साल की बेटी की मां पूजा ने पति की राजनीतिक और सामाजिक विरासत को संभाल रही है,राजनीति को करना है साफपूजा ने कहा, 'परिवार नहीं चाहता था कि राजनीति में आऊं। काफी विरोध के बावजूद मैंने नामांकन करा लिया है। हां, वैसे ही जैसे शादी की थी, सबके खिलाफ जाकर। मेरे पति ने इस इलाके में लोगों की बहुत सेवा की है। लोग चाहते हैं कि हम प्रतिनिधि बने। मैं उनके काम को आगे बढ़ाऊंगी।पूजा से जब प्रधान बनने के पीछे कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा कि गाँव में जुआ, नशाखोरी की वजह से हिंसा अराजकता, बालश्रम, मानव तस्करी, बाल विवाह, महिला हिंसा सहित अशिक्षा काफी बढ़ जाने और चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए तथाकथित लोगों द्वारा मुर्ग़ा दारू आदि प्रलोभन देकर समाज को खोखला कर रहे हैं जिस कारण बच्चों महिलाओं का भविष्य चौपट होता जा रहा है कई परिवार बर्बाद हो गए इनकी स्थिति बहुत दयनीय हो गई है इसी को खत्म करने के लिए वे प्रधान बनना चाहती हैं।पंचायत चुनाव में कुछ बदलाव की सोच से आई हूं।गांव आने पर देखा कि आज भी हमारा गाँव विकास से कोसों दूर है।पूजा ने बताया कि ‘मैं कालेज के समय से ही प्रतियोगिताओं व राजनीतिक डिबेट में प्रतिभाग करती रही हूं और गांव में समय-समय पर आती रहीं हूँ। गांव आने पर देखा कि आज इतने दिनों बाद भी हमारा गाँव विकास से कोसों दूर है, इसलिए पंचायत चुनाव में कुछ बदलाव की सोच ले कर आई हूं।पुरूष वर्चस्व ख़त्म करने को अपनी सत्ता के लिए पंचायत चुनाव में महिलाओं को आगे आने की ज़रूरत है।वर्तमान में महिलाओं की राजनीति में भागीदारी के पीछे उसका पति, पुत्र या पिता का चेहरा होता है। पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं का वर्चस्व आज भी स्वीकार नहीं है। महिलाओं को अपना प्रभाव बढ़ाना होगा तथा राजनीतिक शक्ति का सही उपयोग सीखना होगा। और पुरुषों का वर्चस्व ख़त्म करना होगा अपना प्रभाव बढ़ाएं महिलाएँ खादी पहनी है तो राजनीति से अपराधीकरण, पूंजीवाद, जातिवाद, नशाखोरी और बदहाली को खत्म करने के लिए काम करूंगी।

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